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📚 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

अध्याय 11

Reprint 2025-26

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🌟 "तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र" में आपका स्वागत है

हिंदी साहित्य में प्रहलाद अग्रवाल जी का यह निबंध "तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र" हिंदी फिल्म जगत के एक महान कलाकार की कहानी प्रस्तुत करता है। यह निबंध उस महान गीतकार शैलेंद्र के जीवन और उनकी अमर फिल्म "तीसरी कसम" की गाथा है।

इस इंटरैक्टिव पाठ में हम शैलेंद्र के व्यक्तित्व, उनकी रचनाओं और "तीसरी कसम" फिल्म के निर्माण की चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। हम देखेंगे कि कैसे एक आदर्शवादी कवि ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अमिट छाप छोड़ी और राजकपूर जैसे महान कलाकार के साथ मिलकर एक कालजयी फिल्म का निर्माण किया।

📝 पाठ प्रवेश

साल के किसी महीने का शायद ही कोई शुक्रवार ऐसा जाता हो जब कोई न कोई हिंदी फिल्म सिने परदे पर न पहुँचती हो। इनमें से कुछ सफल रहती हैं तो कुछ असफल। कुछ दशकों को कुछ अर्से तक याद रह जाती हैं, कुछ को वह सिनेमाघर से बाहर निकलते ही भूल जाते हैं। लेकिन जब कोई फिल्मकार किसी साहित्यिक कृति को पूरी लगन और ईमानदारी से परदे पर उतारता है तो उसकी फिल्म न केवल यादगार बन जाती है बल्कि लोगों का मनोरंजन करने के साथ ही उन्हें बेहतर संदेश देने में भी कामयाब रहती है।

एक गीतकार के रूप में कई दशकों तक फिल्म क्षेत्र से जुड़े रहे कवि और गीतकार ने जब फणीश्वर नाथ 'रेणु' की अमर कृति 'तीसरी कसम उर्फ मारे गए गुलफाम' को सिने परदे पर उतारा तो वह मील का पत्थर सिद्ध हुई। आज भी उसकी गणना हिंदी की कुछ अमर फिल्मों में की जाती है।

इस फिल्म ने न केवल अपने गीत, संगीत, कहानी की बदौलत शोहरत पाई बल्कि इसमें अपने ज़माने के सबसे बड़े शोमैन राजकपूर ने अपने फिल्मी जीवन की सबसे बेहतरीन एक्टिंग करके सबको चमत्कृत कर दिया। फिल्म की हीरोइन वहीदा रहमान ने भी वैसा ही अभिनय कर दिखाया जैसी उनसे उम्मीद थी।

इस मायने में एक यादगार फिल्म होने के बावजूद 'तीसरी कसम' को आज इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि इस फिल्म के निर्माण में यह भी उजागर कर दिया कि हिंदी फिल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फिल्म बनाना कितना कठिन और जोखिम का काम है।

अपने विचार चुनिए:

पाठ

प्रश्न अभ्यास

📚 भाषा अध्ययन

पाठ में प्रयुक्त शब्दों के पर्याय और व्याकरण का अध्ययन करिए:

शब्दों के पर्याय चुनिए:

"सैल्यूलाइड" का अर्थ है

"शिद्दत" का पर्याय है

"बमुश्किल" का पर्याय है

"नावाकिफ़" का पर्याय है

"यकीन" का पर्याय है

📝 मुहावरों के प्रयोग

पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों के वाक्य में प्रयोग का चयन करिए:

"चेहरा मुरझाना" का सही प्रयोग है:

"चक्कर खा जाना" का सही प्रयोग है:

"आँखों से बोलना" का सही प्रयोग है:

🔍 संधि विच्छेद

निम्नलिखित शब्दों का संधि विच्छेद कीजिए:

सर्वोत्कृष्ट =

चमत्कर्ष =

रूपांतरण =

🎯 गतिविधियाँ

🔍 आशय स्पष्ट कीजिए

निम्नलिखित वाक्यांश के आशय पर चिंतन कीजिए और अपना विचार व्यक्त कीजिए:

1. "'तीसरी कसम' फिल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी।"

2. "हमारी फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी होती है, लोक-तत्त्व का अभाव।"

📚 क्या आप जानते हैं?

प्रहलाद अग्रवाल (1947)

भारत की आज़ादी के साल मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में जन्मे प्रहलाद अग्रवाल ने हिंदी से एम.ए. तक शिक्षा हासिल की। इन्हें किशोरे वय से ही हिंदी फिल्मों के इतिहास और फिल्मकारों के जीवन और उनके अभिनय के बारे में विस्तार से जानने और उस पर चर्चा करने का शौक रहा।

"तीसरी कसम" की विशेषताएं:

• फिल्म को 'राष्ट्रपति स्वर्णपदक' मिला
• बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार
• मास्को फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कृत
• यह शैलेंद्र की पहली और अंतिम फिल्म थी

शैलेंद्र के प्रसिद्ध गीत:

"मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिशतानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी" - यह गीत आज भी लोकप्रिय है और भारतीयता की भावना को दर्शाता है।